gadaDaily Worship And Cleansing Program


श्री सिद्धबली धाम के मुख्य गर्भग्रह में दो पिण्डीया है। जो बजरंग बली एवं गुरू गोरखनाथ जी की स्वयंभू प्रतिमाये है। यहां हनुमान जी की एक विशाल मूर्ति है। प्रातः ब्रहम मुहर्त में पिण्डीयों का षोडषउपचार के साथ पूजन एवं श्रृंगार किया जाता है। यह माना जाता है कि श्री बजरंग बली जी का श्रृंगार स्त्री को दिखाना निषेध है। इस कारण समस्त श्रृंगार पूजा परदे में की जाती है। गर्भ ग्रह में सर्व प्रथम साधु द्वारा बनाया गया रोट (गुड़, आटा एवं घी की रोटी) का भोग लगाया जाता है यहां का मुख्य प्रसाद भेली (गुड़) है। तत्पश्चात भक्तो द्वारा चढ़ाया गया प्रसाद का भोग लगता है। मुख्य मन्दिर में गुलाब का फूल निषेध है। भक्तो द्वारा बजरंगबली जी को चोला (श्री हनुमान जी को पहनाये जाने वाले वस्त्र) चढ़ाया जाता है। साथ में दो पिण्डीयों को भी चोला चढ़ाया जाता है। चोला चढ़ाने हेतु मन्दिर के मुख्य पुजारी/प्रबन्धक को पहले सूचना देनी आवश्यक होती है। ताकि चोला चढ़ाने का संकल्प लिया जा सके।





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